'कोई ढाई दशक पहले ख्याति लब्ध पत्रकार राजेन्द्र माथुर ने कहा था- ''हम लोकतंत्र में रहते हैं पर दिमाग में राजतन्त्र बसा है..हम जिसे विजयी बनाते हैं उसका जगह-जगह शाही स्वागत करते है,फिर वो अपने राजा मान सुरक्षा के घेरे में हम से दूर हो जाता है तब हमें लोकतंत्र की याद आती है और हम जिसे विजयी बनाया उसे सत्ता से उतार कर दम लेते है''..ये सिलसिला चलता रहता है,जिसे बनाते हैं उसमें राजा की छवि देख दूर हो जाते है और ये दूरी बाद उसे सत्ता से उतार का दम लेती है.
राजेन्द्र माथुर जी रायपुर आये थे और उनको सुनाने बिलासपुर के पत्रकार को जनसंपर्क अधिकारी रविन्द्र पांडेया ले कर गए थे..! नमो ने जीवन के कई रंग देखे होंगे,पर माथुरजी ने जो कहा उसे मैंने सत्य पाया ..हे रब, इस स्वागत और दिखावे के फंदे से इस आम आदमी को बचाए रखना ..!!


